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सकारात्मक सोच कहाँ से आती है | Positive Thinking Hindi Motivational Blog 

सकारात्मक सोच कहाँ से आती है | Positive Thinking

सकारात्मक सोच कहाँ से आती है ? Positive Thinking


Positive Thinking

 दोस्तों, हर कोई बोल रहा है, सफल होना है तो…….. सोच को बदल डालो , सकारात्मक सोचों ………….लेकिन सबसे बड़ा Question यह  है कि, हमारे दिमाग में ये Positive Thinking कहाँ से आती है ?………… क्योंकि अगर यह पता चल जाये तो शायद सोच को बदला जा सकता है।

इस बात को आसानी से समझाने के लिए मनुष्य की तुलना यदि मैं Computer से करूँ तो ठीक होगा । लोग अपने शरीर (Hardware) पर तो बहुत ध्यान देते है,…… देना भी चाहिए, लेकिन  अपने दिमाग (Software) को लावारिस छोड़ देते हैं और यह भूल जाते हैं कि यही दिमाग हमारे शरीर को नियंत्रित करता है। By Default उसकी Negative Programming होती रहती है । जिससे हमे Negative Output या नकारात्मक  परिणाम मिलते हैं ।

क्योंकि हर काम दो बार होता है पहले आपके दिमाग मे उस विचार या Thought  के रूप मे, और दूसरा उस विचार के परिणामस्वरूप वास्तविकता मे होता है !

आपकी Programming के आधार पर आपकी सोच या विचार उत्पन्न होते हैं और आपका शरीर उसका क्रियान्वयन करता है ।  तभी तो कहा जाता है “विचार  बनाए  जिंदगी “ या “जैसी सोच वैसे आप “ ! परन्तु प्रश्न्न  यह उठता है की यह सोच (Positive Thinking) कहाँ से आती है ?

इस दिमाग की programming को समझाने के लिए Psychologist की  Team ने एक झींगुर पर प्रयोग किया    ……..,  उन्होने झींगुर पर एक गिलास रख दिया |  झींगुर का तो nature  ही होता है उछलने का, फुदकने का ,   पर वह जैसे ही फुदकता गिलास से टकराकर गिर जाता ,  फिर फुदकता , फिर गिर जाता | कुछ देर बाद झींगुर को समझ  आ गया की फुदकने से कुछ नहीं होगा , इससे तो अपना सिर फोड़ना ही है | उसने फुदकना बंद कर दिया |

अब Psychologist ने गिलास हटा दिया , पर Interesting बात तो यह है की गिलास हटाने के बाद भी झींगुर ने सिर टकराने के डर से फुदकना ही छोड़ दिया |

वह सिर फूटने की Past Programming के डर से अपने फुदकने के Nature (Potential) को ही भूल चुका था |

दोस्तों ,बचपन से लेकर आज तक आपने जो कुछ भी सुना है ,देखा है या आपके साथ  घटित हुआ है, मतलब आप जिस माहौल में रहते हैं उसका आपके दिमाग पर गहरा प्रभाव पड़ता है। आपके दिमाग की एक Programming हो जाती है……. जिसे हम Past Programming भी कहते है। उदाहरण के तौर पर बचपन मे आपके परिवार मे हिन्दी बोली जाती थी, तो आप भी हिन्दी बोलने लगे ,जिसके यहाँ इंग्लिश बोली जाती है वह इंग्लिश बोलने लगता है । अक्सर नौकरीपेशा लोगों के बच्चों का लक्ष्य अच्छी नौकरी करना होता है ,जबकि एक Businessman अपने बच्चों की प्रोग्रामिंग एक सफल Businessman बनने के लिए करता है ।

वास्तव में हमारा दिमाग एक विचारों की Factory है और  हमारी Past Programming हमारी सोच के लिए एक Raw Material (कच्चा माल) का काम करती है, जिसका हमारे जीवन पर गहरा असर पड़ता है ।

 हम जैसे भी लोगों के सांथ रहते  उनका असर धीरे धीरे हम पर पड़ने लगता है और हमारी सोच भी धीरे धीरे बदलने लगती है, और जब सोच बदलती है तो परिणाम बदलने लगते हैं ।


  कहने का मतलव यह है, जीवन मे सकारात्मक परिणामों के लिए हमेशा positive thinking की आवश्यकता होती है । ध्यान रखे कि………. आप क्या सुन रहे है, क्या पढ़ रहे हैं, क्या देख रहे हैं और  किन लोगों के साथ रह रहें हैं !

ध्यान रहे यहीं से आपकी सोच बनती है , क्योंकि आपकी Programming लगातार हो रही है, चाहे वह Negative हो या Positive।

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: Mind Concentration Tips in Hindi

:Motivation क्यों जरूरी है । 

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नकारात्मक लोगो से सावधान रहें । 

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6 thoughts on “सकारात्मक सोच कहाँ से आती है | Positive Thinking

  1. Kalpana

    Very nice

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