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शून्य से शिखर तक |  Inspirational Story Hindi Inspirational Story 

शून्य से शिखर तक | Inspirational Story

शून्य से शिखर तक |  Inspirational Story

दोस्तों …….… जब हम सफल लोगो की कहानियाँ (inspirational Story) सुनते हैं , तो उससे हमे प्रेरणा मिलती है और हमारे अंदर एक नए जोश का संचार होता है । आज में आपसे ऐसे ही एक व्यक्ति के बारे में बात करने जा रहा हूँ, जिन्होने अपनी दूरदर्शी सोच के कारण शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है…………मैं बात कर रहा हूँ निरमा ब्रांड के संस्थापक “करसन भाई पटेल” की, जिनकी प्रेरणादायक कहानी हम सब को motivate करती है ।





करसन भाई पटेल का नाम भारतीय बिजनेस के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।  इसका कारण  सिर्फ यही नहीं है कि , वह शून्य से शिखर तक पहुंचे…….. इसका मूल कारण  तो यह है कि उन्होंने भारत में कपड़े धोने के साबुन की जगह डिटरजेंट को लोकप्रिय बना दिया।  करसन भाई पटेल की सफलता की कहानी बहुत ही प्रेरणादायक है।

यह उस इंसान की कहानी है जो वर्षों तक कड़ी मेहनत करता रहा…….. जिसने opportunity को पहचाना और अपनी कुशलता से उसका दोहन किया।  करसन भाई पटेल ने अपनी दूरदर्शी सोच से यह पता लगा लिया कि………. सस्ता डिटर्जेंट पाउडर बहुत लोकप्रिय हो सकता है।  इस विचार पर अमल करते हुए उन्होंने निरमा ब्रांड का पीला डिटर्जेंट पाउडर तैयार किया और बाजार में उतारा।




निरमा के कम दाम के कारण भारतीय ग्राहिणयां साबुन के बजाए……… डिटरजेंट पाउडर से कपड़े धोने के लिए प्रेरित हुई। कम कीमत निरमा की सफलता का एक बहुत बड़ा कारण थी। शुरुआत में करसनभाई का  निरमा 3:30 रुपए किलो में बिकता था……….. जबकि हिंदुस्तान लीवर के सर्फ की कीमत 15 रुपये किलो थी। सर्फ की Quality ज्यादा अच्छी थी…… लेकिन निरमा काफी सस्ता था । कीमतों के इस भारी अंतर की वजह से निरमा  भारतीय ग्रहणिओं के बीच में काफी लोकप्रिय हो गया ।

business plan tree

 1977 में करसन भाई ने रेडियो पर विज्ञापन देना शुरु किया……. सिनेमाघरों में भी निरमा  के विज्ञापन दिखाई देने लगे,  बाद में टीवी पर भी विज्ञापनों का सिलसिला शुरु हुआ।  जल्दी ही निरमा की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बन गई……… निरमा अपनी कम कीमत के कारण  हिंदुस्तान लीवर के महंगे सर्फ को कई इलाकों में पीछे छोड़ दिया। मजे की बात यह है कि………….. करसन भाई ने कही मैनेजमेंट की एजुकेशन नहीं ली,  उनकी सफलता………. उनकी दूरद्रष्टि और व्यापारिक बुद्धि  का ही परिणाम है।

 एक छोटे से कमरे से शुरू हुई कंपनी आज लाखों वर्ग फुट की कई फैक्ट्रियों में फैल चुकी है।  1969 में अपना डिटरजेंट बिजनेस शुरू करते समय करसन भाई पटेल को अपनी सरकारी नौकरी में हर महीने ₹400 तनख्वाह मिलती थी । समय का फेर देखिए निरमा केमिकल्स में  आज 14000 से अधिक कर्मचारी हो गए और वे बेहद अमीर बन चुके हैं ।

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                     :जोख़िम और सफलता 

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3 thoughts on “शून्य से शिखर तक | Inspirational Story

  1. Thanks sir…..
    Aap ke dwara likha gai is story ne mujhe bahut motivated kar diya ki ek insaan 0 se top par ja sakta hai…..
    Thank u very much sir

  2. Bahut hi umda …. very nice and motivational story … in Hindi!! 🙂 🙂

    1. kyakahengelog.com

      Thanks

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