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Past Programming |  Re-Programme Yourself Hindi Motivational Blog 

Past Programming |  Re-Programme Yourself

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दोस्तों , हम बचपन  से ही हमारे आसपास के लोगों से कुछ न कुछ सीखते आए हैं और यही चीज़ हमारे विचारों पर भी गहरा असर डालती है , अगर हमारे आस पास का environment negative है  तो आप  negative thoughts ही gain करेंगे और अगर positive है तो positive thoughts…




पर सबसे बड़ी problem है कि हमारा दिमाग  by default , negative thoughts को ही gain करता है पर positive thoughts की ख़ुराक के लिए हमे मेहनत  करनी पड़ती है ,दोस्तों  इस Mind-Set को हम  past programming भी कहते है ।

एक story के जरिये आप अच्छे से समझ पाएंगे –

Psychologist की  team ने एक झींगुर पर study की  ,  उन्होने झींगुर पर एक गिलास रख दिया |  झींगुर का तो nature  ही होता है उछलने का, फुदकने का ,   पर वह जैसे ही फुदकता गिलास से टकराकर गिर जाता ,  फिर फुदकता , फिर गिर जाता | कुछ देर बाद झींगुर को समझ  आ गया की फुदकने से कुछ नहीं होगा , इससे तो अपना सिर फोड़ना ही है | उसने फुदकना बंद कर दिया |




अब psychologist ने गिलास हटा दिया ,  पर interesting बात तो यह है की गिलास हटाने के बाद भी झींगुर ने सिर टकराने के डर से फुदकना ही छोड़ दिया |

वह सिर फूटने की past programming के डर से अपने फुदकने के nature (potential) को ही भूल चुका था |

दोस्तों ! सोचिए कितनी powerful है past programming – हम मे भी potential है । लेकिन  past programming के गिलास के कारण हम  खुद को पहचान नहीं पा रहे है , …….. जरूरत है तो दिमाग से उस गिलास को हटाने की |  हमे अपने potential को पहचान कर आज बल्कि अभी से उस dream के लिए काम करना start कर देना चाहिए जो आपको सोने नहीं देता |

और किसी ने  खूब कहा है –

हम भी दरिया है हमे  अपना हुनर मालूम है , जिस तरफ चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा |

Good luck

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Also Readआत्म-विश्वास कैसे बढ़ाये ?

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3 thoughts on “Past Programming |  Re-Programme Yourself

  1. Paramjeet singh

    Very nice to read you sir.
    It is written in very simple and perfect maaner so tht evry one can learn from it.

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